किससे मिलेगी राहत और किसको लगेगा झटका अरावली पर्वत पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुराने आदेश पर लगी रोक
नई दिल्ली। अरावली पर्वत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने अपने ही पुराने फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब अरावली पहाड़ियों से जुड़ा कोई नया नियम तब तक लागू नहीं होगा, जब तक विशेषज्ञों की नई रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती।📊 आंकड़ों के आधार पर होगा फैसला
कोर्ट ने यह भी कहा कि आगे का फैसला उपग्रह तस्वीरों, पुराने सरकारी रिकॉर्ड और वैज्ञानिक डाटा के आधार पर लिया जाएगा। इससे यह साफ होगा कि अरावली का असली फैलाव कितना है और कहां-कहां उसे नुकसान पहुंचा है।
कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों को लेकर एक नई परिभाषा तय की थी। इसमें कहा गया था कि जो जमीन आसपास की जमीन से 100 मीटर ऊंची होगी, उसे अरावली की पहाड़ी माना जाएगा। इसी फैसले को लेकर देशभर में विवाद शुरू हो गया। जानिए अरावली पर्वत के 100 मीटर वाले पर्वत बचेंगे या नहीं
🌿 पर्यावरण विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
इस फैसले पर कई पर्यावरण संगठनों ने नाराज़गी जताई थी। उनका कहना था कि इस नियम से अरावली का बड़ा इलाका सुरक्षा कानून से बाहर हो सकता है। इससे
- खनन बढ़ने का खतरा
- जंगलों की कटाई
- पानी और हवा पर बुरा असर
जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
⚖️ कोर्ट ने क्यों बदला रुख?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जल्दबाजी ठीक नहीं है। पर्यावरण से जुड़ा मामला होने के कारण पूरी जांच और विशेषज्ञों की राय जरूरी है। इसी वजह से कोर्ट ने पुराने आदेश को अभी के लिए रोक दिया है।इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में तकनीकी परिभाषाओं से ज्यादा जमीन की सच्चाई मायने रखती है। अदालत चाहती है कि फैसला कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी हालात देखकर लिया जाए।
🏗️सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिल्डरों और उद्योगों की बढ़ी टेंशन
अरावली पर्वत पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुराने आदेश पर लगी रोक कोर्ट के फैसले के बाद अरावली से सटे इलाकों में काम कर रहे बिल्डर और उद्योग जगत भी अलर्ट मोड में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नियम सख्त हुए, तो कई प्रोजेक्ट्स पर रोक लग सकती है या उन्हें दोबारा मंजूरी लेनी पड़ सकती है।
👨⚕️ नई समिति बनाएगी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
कोर्ट ने सरकार से कहा है कि एक नई विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। यह समिति बताएगी कि अरावली को लेकर नई परिभाषा सही है या नहीं और इसका असर पर्यावरण पर क्या पड़ेगा। रिपोर्ट आने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अब सिर्फ केंद्र ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। कोर्ट चाहता है कि राज्य खुद निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमों का उल्लंघन न हो।अदालत ने यह भी संकेत दिए हैं कि विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट बेहद समय पर सौंपे। कोर्ट का मानना है कि देरी होने से अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
⛏️ खनन पर फिलहाल क्या स्थिति?
- नई खनन लीज़ नहीं दी जाएंगी
- जो खनन पहले से चल रहा है, उस पर कड़ी नजर रहेगी
- अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी
📅सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अगली सुनवाई कब?
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में करेगा। तब तक अरावली पर्वत से जुड़ी स्थिति जैसी है वैसी बनी रहेगी।
इसका श्रेय यूएन सभी लोगों को जाता है जिन्हों ने सोशल मीडिया के जरिए प्रोटेक्ट किया और गुजरात के सभी लोगों ने जिन्हों पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए अरावली पर्वत का संरक्षण किया सोशल मीडिया इंस्टाग्राम फेसबुक यूट्यूब ब्लॉगर्स इनहोन कर दिखाया कि अगर एक बार हमने सोच लिया तो हम कुछ भी कर सकते हैं